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तमिलनाडु: निजी शिक्षा संस्थान और नियोक्ता जाति विवरण नहीं मांग सकते
मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि तमिलनाडु में किसी भी निजी शैक्षणिक संस्थान या नियोक्ता को अनिवार्य रूप से किसी व्यक्ति के जाति विवरण को एकत्र करने का अधिकार नहीं है।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि तमिलनाडु में किसी भी निजी शिक्षण संस्थान या नियोक्ता को छात्रों या कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से जाति संबंधी जानकारी एकत्र करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। न्यायालय की यह टिप्पणी संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक स्वतंत्रता और गोपनीयता के अधिकारों की रक्षा करने के लिए आई है।
न्यायालय ने माना कि किसी भी निजी संगठन द्वारा व्यक्तिगत जानकारी के रूप में जाति विवरण एकत्र करना न केवल अनावश्यक है, बल्कि व्यक्तिगत गोपनीयता के अधिकार का भी उल्लंघन करता है। यह निर्णय उन मामलों में विशेष रूप से प्रासंगिक है जहां ऐसी जानकारी का कोई वैध प्रशासनिक या कानूनी उद्देश्य नहीं होता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हालांकि सरकारी संस्थान सामाजिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक जनांकिकीय डेटा एकत्र कर सकते हैं, लेकिन निजी संस्थान ऐसा नहीं कर सकते। यह निर्णय सभी निजी स्कूलों, कॉलेजों और कार्पोरेट संस्थाओं पर लागू होगा।
इस निर्णय का तात्पर्य यह है कि जो निजी संगठन अपने आवेदन पत्रों या नामांकन फॉर्मों में जाति का विवरण मांग रहे हैं, उन्हें ऐसी प्रथा को तुरंत बंद करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत के विभिन्न हिस्सों में अन्य उच्च न्यायालयों के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है।