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तमिलनाडु में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम विफल, सड़कों पर नज़र आती हैं समस्याएं
तमिलनाडु का पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम गंभीर संकट में है। रिपोर्ट में इस योजना की खस्ता हालत, अमानवीय प्रबंधन और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं।
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तमिलनाडु में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम की विफलता राज्य की सड़कों पर साफ दिखाई दे रही है। आवारा पशुओं की संख्या में लगातार वृद्धि और कार्यक्रम के कमजोर क्रियान्वयन से राज्य में जनस्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
यह कार्यक्रम जो पशु आबादी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, अब पूरी तरह से चरमरा गया है। अधिकारियों की लापरवाही, संसाधनों की कमी और स्थानीय स्तर पर सही निगरानी न होने के कारण यह योजना अपने लक्ष्यों से बहुत दूर है। विभिन्न जिलों में कार्यक्रम के संचालन में व्यवस्था की कमी और पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है।
कार्यक्रम को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों की भी चिंताएं उजागर हुई हैं। उन्होंने पशुओं के साथ दुर्व्यवहार, अनुचित चिकित्सा प्रक्रियाओं और कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए हैं। राज्य सरकार से इस व्यवस्था को सुधारने और पशु कल्याण सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यक्रम को पुनः संरचित करने की तत्काल आवश्यकता है। बेहतर प्रशिक्षण, पर्याप्त वित्त आवंटन और कड़ी निगरानी के बिना यह योजना आगामी वर्षों में भी सफल नहीं हो सकेगी।