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जाति आधारित सर्वेक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़, विभिन्न पक्षों में चिंता

तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू किए गए सामाजिक न्याय सर्वेक्षण को लेकर देश भर में बहस छिड़ गई है। आगामी वर्ष फरवरी में जनगणना के दूसरे चरण में जाति से संबंधित सूचनाएं एकत्रित करने की योजना से विभिन्न राजनीतिक दल और हितधारक चिंतित हैं।

LSN India · 31 October 2026

जाति आधारित सर्वेक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़, विभिन्न पक्षों में चिंता

तमिलनाडु की सत्तारूढ़ TVK पार्टी द्वारा प्रस्तावित सामाजिक न्याय सर्वेक्षण ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य विभिन्न जातीय समूहों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करना है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

जनगणना के दूसरे चरण में एक 'खुली कॉलम' का फीचर शामिल किया जाएगा, जिसमें उत्तरदाता स्वयं अपनी जाति दर्ज कर सकेंगे। यह व्यवस्था अगले वर्ष फरवरी में देश के अधिकांश हिस्सों में लागू की जाएगी। इस पहल को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नीति निर्माताओं के बीच गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है।

आलोचकों का मानना है कि ऐसे सर्वेक्षण के परिणामों की प्रामाणिकता और उपयोगिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका तर्क है कि स्व-घोषित जाति की जानकारी पूरी तरह सटीक नहीं हो सकती और इससे नीति निर्माण में त्रुटि की संभावना रहती है।

इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद का केंद्र बिंदु यह है कि क्या जाति-आधारित डेटा संग्रह वास्तव में सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा कर सकता है। इसी विवाद के बीच सरकार की योजना पर भविष्य की कार्रवाई की प्रतीक्षा जारी है।