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तमिलनाडु का कर्ज संकट: दस साल में 309% की बढ़ोतरी, भुगतान का दबाव
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में तमिलनाडु के कर्ज में भारी इजाफे का संकेत मिला है। आने वाले सात साल में भारी कर्ज भुगतान की जिम्मेदारी राज्य के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
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तमिलनाडु का कर्ज पिछले दशक में 309 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में यह चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कुल कर्ज का एक बड़ा हिस्सा अगले सात साल के भीतर चुकाना है। यह अपेक्षाकृत कम अवधि में बड़ी राशि का भुगतान करने का दबाव बढ़ाता है और राज्य की विकास योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
महालेखा परीक्षक ने आशंका व्यक्त की है कि कर्ज भुगतान की बढ़ती जिम्मेदारी तमिलनाडु को नए कर्ज लेने के लिए बाध्य कर सकती है। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य को अपने राजस्व को बेहतर करने और खर्च में नियंत्रण लाने की तत्काल आवश्यकता है। केवल इसी तरह से तमिलनाडु अपने कर्ज संकट से निपट सकेगा और भविष्य की विकास परियोजनाओं को बेहतर तरीके से लागू कर पाएगा।