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तमिलनाडु का अलग झंडे की मांग पांच दशक पुरानी है
तमिलनाडु ने अपने अलग झंडे की मांग पचास साल से अधिक समय पहले उठाई थी, जब करुणानिधि ने 1970 में इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रखा था। हालांकि, केंद्र ने इस मांग को खारिज कर दिया।
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तमिलनाडु की अलग राजकीय झंडे की मांग भारतीय राजनीति का एक लंबे समय का मुद्दा रही है। इसकी शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, जब तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने पहली बार यह मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष उठाया था।
करुणानिधि की ओर से किए गए इस प्रस्ताव में तर्क दिया गया था कि एक अलग झंडा राज्य की सांस्कृतिक पहचान और स्वतंत्र अस्मिता को प्रतिबिंबित करेगा। हालांकि, भारत की एकता और संविधानिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।
पचास साल बाद भी यह मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में प्रासंगिक बना हुआ है और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा समय-समय पर उठाया जाता है। राज्य की सांस्कृतिक विशिष्टता और भाषिक गौरव को लेकर उठाई गई यह मांग राज्य के हलकों में महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।