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मेट्टूर बांध: तमिलनाडु के धान पेटी के लिए जीवनरक्त
मानसून की कमजोरी के बीच मेट्टूर बांध से पानी की रिहाई में देरी हुई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 1 सितंबर 2026 को बांध से पानी छोड़ने की घोषणा करेंगे।
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तमिलनाडु के धान उत्पादक क्षेत्र के लिए मेट्टूर बांध पानी की आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। बांध से आने वाला पानी राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। हर साल इसी बांध के पानी पर लाखों किसान अपनी फसल के लिए निर्भर रहते हैं।
इस बार मानसून की कमजोर परिस्थितियों के कारण बांध से पानी की रिहाई में देरी हुई है। सामान्य वर्षों की तुलना में इस बार वर्षा कम हुई है, जिससे बांध में पानी का स्तर प्रभावित हुआ है। इस स्थिति में किसानों को खरीफ सीजन की बुवाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 1 सितंबर 2026 को बांध के जलद्वार खोलने की घोषणा की है। इस निर्णय के साथ किसानों को पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी और खेतों में सिंचाई का काम आगे बढ़ सकेगा। मेट्टूर बांध परियोजना से संबंधित अधिकारियों ने इस अनुसूची की तैयारी शुरू कर दी है।
मेट्टूर बांध का निर्माण भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण जलविद्युत और सिंचाई परियोजना रही है। इसके जलाशय से तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्य को लाभ मिलता है। बांध की जल प्रबंधन नीति इन दोनों राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहती है।