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एल नीनो का असर बाकी भारत से अलग होगा तमिलनाडु में
मजबूत एल नीनो के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के बीच दबाव के अंतर से नम हवा तमिलनाडु के तटीय इलाकों में प्रवेश कर सकती है। जब एल नीनो गर्म जल से जुड़ता है तो वाष्पीकरण बढ़ता है और नवंबर-दिसंबर में चक्रवाती प्रभाव तीव्र स्थानीय वर्षा लाते हैं।
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दक्षिण भारत के मौसम विज्ञान विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले एल नीनो चक्र में तमिलनाडु को भारत के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग मौसमी प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। शक्तिशाली एल नीनो वर्षों में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के बीच पैदा होने वाले दबाव के अंतर से नम वायु राशि तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों की ओर अपना रुख कर सकती है।
जब एल नीनो की स्थिति बंगाल की खाड़ी में असामान्य रूप से गर्म जल के साथ मिलती है, तो समुद्री सतह से वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है। इस अतिरिक्त नमी को वायुमंडल में संचित किया जाता है, जो बाद में चक्रवाती परिसंचरण के माध्यम से मुक्त होती है।
नवंबर और दिसंबर के महीनों में इन चक्रवाती प्रणालियों के कारण तमिलनाडु के कुछ इलाकों में अत्यधिक और केंद्रित वर्षा होने की संभावना रहती है। यह पैटर्न देश के बाकी हिस्सों में एल नीनो के सामान्य प्रभाव से काफी हद तक भिन्न हो सकता है, जहां आमतौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्रीय विशেषता को समझना कृषि नीति और आपातकालीन तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था सहित दक्षिणी राज्यों को इन स्थानीय मौसमी भिन्नताओं के लिए अलग से तैयारी करनी चाहिए।