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तमिलनाडु में 18,700 से अधिक POCSO मामले लंबित, पीड़ित बच्चों को दोहरी पीड़ा
तमिलनाडु के 38 जिलों की अदालतों में 18,733 POCSO मामले लंबित हैं। न्याय प्रक्रिया से गुजरने वाले बच्चों को अपर्याप्त सहायता सेवाएं मिलने से उनकी पीड़ा बढ़ जाती है।
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तमिलनाडु में यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों को न्याय प्राप्ति के लिए लंबी और कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। राज्य के विभिन्न न्यायालयों में 18,733 POCSO (बच्चों का यौन शोषण निरोधक कानून) मामले मुकदमे की प्रतीक्षा में पड़े हैं। यह संख्या पूरे 38 जिलों में फैली है, जो न्याय तंत्र पर भारी दबाव को दर्शाती है।
इन लंबित मामलों की समस्या केवल कानूनी देरी तक सीमित नहीं है। पीड़ित बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कानूनी सहायता और पुनर्वास सेवाएं अपर्याप्त हैं। न्याय प्रक्रिया से गुजरते समय बच्चों को दोहरी पीड़ा का सामना करना पड़ता है - एक तरफ यौन शोषण के आघात से और दूसरी तरफ लंबित कार्यवाही के कारण।
न्याय में विलंब का अर्थ है कि बचपन की महत्वपूर्ण वर्षों में ये बच्चे अनिश्चितता और तनाव में रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शीघ्र न्याय निपटान के लिए अदालतों को अतिरिक्त संसाधन और समर्पित सहायता सेवाएं प्रदान की जानी चाहिए।
पीड़ित बच्चों के पुनर्वास और सामाजिक पुनः एकीकरण के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। सरकार और न्याय प्रणाली को मिलकर POCSO मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और पीड़ितों के लिए व्यावहारिक सहायता तंत्र स्थापित करने पर ध्यान देना चाहिए।