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करूर के बुनकर ने तिरुक्कुरल को कपास में बुना, 133 पन्नों की किताब तैयार की
करूर के बुनकर आर. प्रभु ने अपनी कारीगरी से तमिल साहित्य की प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल को कपास के कपड़े पर बुन दिया है। इस अनोखी 133 पन्नों की कपड़े की किताब को वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को भेंट देना चाहते हैं।
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करूर जिले के बुनकर आर. प्रभु ने परंपरागत बुनाई कला को आधुनिक साहित्य के साथ जोड़कर एक अभूतपूर्व कृति तैयार की है। उन्होंने तमिल साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ तिरुक्कुरल को कपास के तागों से बुनकर एक अद्भुत 133 पन्नों की किताब का रूप दिया है। यह परियोजना बुनाई की पारंपरिक तकनीक और साहित्यिक विरासत के संरक्षण का एक प्रयास है।
प्रभु की इस अनूठी कृति में तिरुक्कुरल के सभी छंद कपास के कपड़े पर बारीकी से बुने गए हैं। इस कार्य को पूरा करने में उन्होंने महीनों की मेहनत की है और अपनी बुनाई कौशल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। कपड़े पर बने अक्षर साफ और सुपाठ्य हैं, जो बुनकर की कारीगरी की बेजोड़ता को दर्शाते हैं।
प्रभु की इस मौलिक कल्पना से तमिल संस्कृति और परंपरागत कला दोनों को प्रचार-प्रसार मिलता है। यह कपड़े की किताब न केवल एक साहित्यिक कृति है, बल्कि कारीगरों के कौशल और समर्पण का जीवंत उदाहरण भी है। प्रभु ने इस अद्भुत रचना को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को भेंट करने का इरादा रखा है।