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केंद्रीय योजना के तहत बने किसान समूह, लक्ष्य दबाव से प्रभावित: रिपोर्ट
2021 के बाद स्थापित कृषक उत्पादक संगठनों की पूंजी में भारी अंतर देखा गया है। सर्वेक्षण में पाया गया कि अधिकांश समूहों को संस्थागत ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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एक विस्तृत सर्वेक्षण से पता चलता है कि केंद्रीय योजना के तहत गठित कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) बड़ी संख्या में लक्ष्य पूरा करने के दबाव में बनाए गए हैं। 2021 से पहले स्थापित संगठनों की औसत चुकता पूंजी 5 लाख रुपये थी, जबकि इसके बाद बने नए संगठनों में यह महज 1 लाख रुपये रही।
यह अंतर संगठनों की संरचनात्मक कमजोरियों को दर्शाता है। नए एफपीओ में पर्याप्त वित्तीय आधार न होने से ये किसानों को प्रभावी सेवाएं प्रदान करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कमजोरी दीर्घकालीन विकास में बाधा डालती है।
सर्वेक्षण में शामिल सात में से दस एफपीओ को किसी भी प्रकार की संस्थागत ऋण सुविधा नहीं मिल रही है। बैंकिंग चैनल से अलग-थलग पड़े ये संगठन किसानों को आवश्यक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में विफल हो रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए नीति में सुधार और बेहतर निरीक्षण तंत्र की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।