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H-1B वीजा धारकों को निशाना बनाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है
भारतीय मूल के पेशेवरों के खिलाफ बढ़ती राजनीतिक नकारात्मकता के बीच इंडियास्पोरा संगठन ने चेतावनी दी है कि H-1B वीजा धारकों को निशाना बनाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
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प्रवासी भारतीयों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली गैर-लाभकारी संस्था इंडियास्पोरा ने अमेरिकी चुनाव सीजन में भारतीय मूल के पेशेवरों के खिलाफ राजनीतिक रुख के विरुद्ध गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने 30 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि भारत से आने वाले H-1B कर्मचारियों ने अमेरिका को विश्व का नवाचार नेता बनाने में मदद की है और अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन पेशेवरों को प्रतिकूल नीतियों के माध्यम से अमेरिका से दूर करने से देशभर के शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
संगठन ने प्रस्तावित नियामक उपायों पर भी आपत्ति जताई है, जिनमें उच्च-प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के नियोक्ताओं के लिए 1,00,000 डॉलर से अधिक की आवेदन शुल्क और लॉटरी प्रणाली को बदलकर वेतन-आधारित तंत्र लागू करना शामिल है।