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टाटा समूह के नियंत्रण को लेकर तीव्र संघर्ष, चंद्रशेखरन के कार्यकाल का विस्तार
टाटा समूह के बोर्ड ने चंद्रशेखरन के पांच साल के कार्यकाल का विस्तार मंजूर किया, जिससे समूह को सार्वजनिक करने की योजना आगे बढ़ेगी। यह निर्णय समूह को निजी रखने की ट्रस्ट अध्यक्ष नोएल टाटा की अपील को खारिज करता है।
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टाटा समूह के शीर्ष निकाय ने एक महत्वपूर्ण मतदान में प्रबंध निदेशक एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चार सदस्यों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि एक सदस्य ने विरोध किया। यह निर्णय पिछले 24 घंटों में हुई गहन चर्चाओं के बाद आया है।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार के साथ ही बोर्ड ने समूह की सार्वजनिक सूचीकरण की योजना को भी आगे बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इससे टाटा समूह के शेयरों को बाजार में सूचीबद्ध करने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम समूह को और अधिक पारदर्शी और विस्तृत निवेशक आधार के साथ एक वैश्विक संस्था के रूप में स्थापित करेगा।
हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा इस निर्णय के खिलाफ थे। उन्होंने समूह को एक निजी संस्था के रूप में रखने का समर्थन किया था। उनका मानना था कि सार्वजनिक सूचीकरण से समूह की दीर्घकालिक रणनीति और परिवार केंद्रित मूल्यों को नुकसान हो सकता है।
यह निर्णय टाटा समूह के भविष्य की दिशा निर्धारण में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। समूह के विभिन्न हितधारकों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद रहे हैं, किंतु बोर्ड की बहुमत राय स्पष्ट रूप से आधुनिकीकरण और विश्वव्यापी विस्तार की ओर झुकी हुई है। आने वाले महीनों में इस योजना को कार्यान्वित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।