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पूंजीगत लाभ कर में कटौती से विदेशी निवेश बढ़ेगा? विशेषज्ञों का जवाब
विदेशी संस्थागत निवेशकों के प्रवाह को बढ़ाने के लिए दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर में कमी जरूरी हो सकती है, लेकिन यह अकेले इस समस्या का समाधान नहीं होगा, यह मानना है वित्तीय विश्लेषकों का।
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भारत की पूंजी की कमी वाली अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ कर यानी एलटीसीजी में कमी वांछनीय तो हो सकती है, लेकिन यह अकेले विदेशी संस्थागत निवेशकों के निरंतर प्रवाह को बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। यह मत बर्नस्टीन के विश्लेषक वेणुगोपाल गर्रे ने व्यक्त किया है।
विश्लेषकों के अनुसार, पूंजीगत लाभ पर लगने वाले कर को कम करना तो एक सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं है। निवेश के प्रवाह को बढ़ाने के लिए अर्थव्यवस्था की व्यापक स्थिति, नीतिगत स्थिरता और बाजार के विश्वास में सुधार की आवश्यकता होती है।
अल्पकालीन पूंजीगत लाभ कर यानी एसटीसीजी में कटौती का भी प्रश्न इसी संदर्भ में उठाया गया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल कर में बदलाव से ही विदेशी संस्थागत निवेशकों को लंबे समय तक भारत में निवेश के लिए प्रेरित नहीं किया जा सकता।
भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि हाल के महीनों में एफपीआई के प्रवाह में कमी आई है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार और नीति निर्माताओं को एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत होगी।