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कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नैतिक बनाने के लिए टेक कंपनियां धर्म की ओर मुड़ रही हैं
शक्तिशाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित करने की होड़ में टेक कंपनियां अब धर्म और आध्यात्मिक परंपराओं की मदद ले रही हैं। ये कंपनियां मानती हैं कि धार्मिक ज्ञान एआई को नैतिक रूप से सही तरीके से सिखाने में मदद कर सकता है।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में तेजी लाने वाली टेक कंपनियां अब एक नए सवाल का जवाब खोज रही हैं - कैसे चैटबॉट को सही और गलत के बीच फर्क सिखाया जाए। इस चुनौती का समाधान वे धर्म में ढूंढ रहे हैं।
एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक क्रिस ओलाह ने इसी साल वेटिकन में पोप लियो चतुर्दश के एआई संबंधी विश्वपत्र के अवसर पर कहा कि ये सवाल प्रयोगशाला में हल नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि ये वो सवाल हैं जिन्हें धार्मिक परंपराएं हजारों साल से संभाले हुए हैं।
जहां टेक जगत में धर्म की ओर यह रुख चल रहा है, वहीं यह स्पष्ट नहीं है कि ये कंपनियां धर्म को लेकर वास्तव में क्या सोचती हैं और इससे क्या हासिल करना चाहती हैं। तकनीकी कंपनियों के शीर्ष नेता एआई के संभावित नुकसान को लेकर चिंता जता रहे हैं और नैतिक रूप से सही मॉडल विकसित करने की बहस चला रहे हैं।
इसी कड़ी में वे दार्शनिकों और धार्मिक नेताओं से मार्गदर्शन ले रहे हैं। इन कंपनियों का मानना है कि धर्म एआई को नैतिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर ऐसे माहौल में जहां एआई को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं फैली हुई हैं।