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तकनीक का भविष्य करुणा पर आधारित होना चाहिए: कैलाश सत्यार्थी
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित सभी तकनीकों के विकास में मानवीय करुणा को मूल सिद्धांत बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह दृष्टिकोण तकनीकी डिजाइन, विकास और तैनाती के हर स्तर पर प्रतिबिंबित होना चाहिए।
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बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी का कहना है कि भविष्य की तकनीक को करुणा के सिद्धांत पर निर्मित होना चाहिए। उनके विचार में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती तकनीकों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वे मानवता के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
सत्यार्थी के अनुसार, करुणा को केवल एक वैकल्पिक विचार नहीं बल्कि तकनीकी विकास का केंद्रीय सिद्धांत माना जाना चाहिए। वे मानते हैं कि किसी भी तकनीक को डिजाइन करते समय, उसे विकसित करते समय और समाज में लागू करते समय इसी सिद्धांत को प्रमुखता दी जानी चाहिए।
उनका यह दृष्टिकोण तेजी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्यार्थी का तर्क है कि जब तकनीक मानवीय मूल्यों और नैतिकता को ध्यान में रखकर विकसित की जाती है तो समाज के सभी वर्गों के लिए इसके लाभ अधिक होते हैं।