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17 वर्षीय भारतीय मूल के बेंजामिन ने बनाई सस्ती दिमाग-नियंत्रित कृत्रिम भुजा
बेंजामिन चोई ने महामारी के दौरान एक क्रांतिकारी कृत्रिम अंग विकसित किया है जो मस्तिष्क की तरंगों को पढ़ता है। यह उपकरण लागत में भारी कमी करते हुए अत्याधुनिक तकनीक को सुलभ बनाता है।
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बेंजामिन चोई, मात्र 17 वर्ष के युवा इंजीनियर ने एक अभूतपूर्व तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने एक ऐसी कृत्रिम भुजा विकसित की है जो गैर-आक्रामक विद्युत इलेक्ट्रोड के माध्यम से मानव मस्तिष्क की तरंगों को पढ़ सकती है और उसके अनुसार कार्य करती है।
यह अभिनव उपकरण बनाने में चोई को लगभग 300 डॉलर का निवेश करना पड़ा, जो पारंपरिक उन्नत कृत्रिम अंगों की कीमत का एक अंश है। इस परियोजना को शुरू करने के पीछे उनका मकसद था कि विकलांगता को दूर करने की तकनीक को सभी के लिए सुलभ बनाया जाए, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनके पास महंगी प्रौद्योगिकी तक पहुंच नहीं है।
कृत्रिम भुजा को नियंत्रित करने के लिए उपयोगकर्ता मस्तिष्क की तरंगों के साथ-साथ सिर के इशारों का भी उपयोग कर सकते हैं। यह बहुआयामी नियंत्रण प्रणाली मशीन लर्निंग तकनीकों पर आधारित है जो समय के साथ उपयोगकर्ता की जरूरतों के अनुसार सुधार करती है।
चोई की इस अभूतपूर्व कार्य ने उन्हें शैक्षणिक और प्रौद्योगिकी समुदाय में पर्याप्त मान्यता दिलाई है। उन्हें अपनी शोध को आगे बढ़ाने के लिए निधि भी प्राप्त हुई है। वह अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के अनुप्रयोगों को और अधिक विकसित करने पर काम कर रहे हैं।