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आर्कटिक बर्फ पिघलने को रोकने के लिए किशोरी वैज्ञानिक बैक्टीरिया विकसित कर रहीं

मात्र 17 वर्ष की एक भारतीय किशोरी ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक अभिनव समाधान खोज निकाला है। वह आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ के पिघलने की गति को धीमा करने के लिए बैक्टीरिया को इंजीनियर करने का काम कर रही हैं।

LSN India · 13 October 2026

आर्कटिक बर्फ पिघलने को रोकने के लिए किशोरी वैज्ञानिक बैक्टीरिया विकसित कर रहीं

जलवायु संकट से जूझती दुनिया में एक नई उम्मीद की किरण नजर आई है। भारत की एक प्रतिभाशाली किशोर वैज्ञानिक ने आर्कटिक क्षेत्र में तेजी से बर्फ पिघलने की समस्या का समाधान खोजने का प्रयास शुरू किया है। यह 17 वर्षीय छात्रा आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करके बैक्टीरिया में संशोधन कर रही है।

इस परियोजना का मूल उद्देश्य ऐसे सूक्ष्मजीवों का विकास करना है जो आर्कटिक के ग्लेशियरों पर एक सुरक्षात्मक परत बना सकें। इससे सूर्य के प्रकाश के अवशोषण में कमी आ सकती है और बर्फ के पिघलने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है। यह पद्धति पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ समाधान प्रदान करने का वादा करती है।

इस युवा वैज्ञानिक की यह पहल वैश्विक जलवायु संकट से निपटने के लिए नए दृष्टिकोण का प्रतीक है। भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए ऐसी नवीन तकनीकें महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परीक्षण सफल रहे तो वैश्विक तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।