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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से 2015 के नकद-के-बदले-वोट मामले को रद्द करने की अपील की
रेवंत रेड्डी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 2018 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में संशोधन से पहले रिश्वत देना अपराध नहीं था। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से साल 2015 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है।
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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट से एक पुरानी नकद-के-बदले-वोट मामले की एफआईआर को रद्द करने की अपील की है। इस मामले की एफआईआर 2015 में दर्ज की गई थी। रेड्डी की ओर से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि 2018 में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में संशोधन किए जाने से पहले रिश्वत देने का कार्य इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध नहीं था।
मुख्यमंत्री के विधिक दल ने तर्क दिया कि जब से अधिनियम में यह संशोधन हुआ है, तब से ही रिश्वत देना एक पृथक अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है। याचिका में कहा गया है कि उस समय लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार, 2015 में की गई कार्रवाई को वर्तमान कानूनी मानदंडों के तहत नहीं परखा जा सकता है।
इस मामले के संदर्भ में कहा जा रहा है कि नए कानूनी ढांचे के तहत पुरानी कार्रवाइयों को पुनर्परीक्षित किए जाने का प्रश्न उठाया जा रहा है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या भविष्य के कानूनी मामलों के लिए महत्वपूर्ण मानदंड स्थापित कर सकती है।