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तेलंगाना सरकार आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री के समझौते के रुख को संदेह से देख रही है
तेलंगाना के अधिकारियों ने राज्य विभाजन से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के 'देना-लेना' के रवैये को लेकर संदेह जताया है। तेलंगाना का पक्ष पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने पर अडिग है।
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तेलंगाना सरकार के अधिकारियों ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य विभाजन से संबंधित विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रस्तावित समझौते के दृष्टिकोण को लेकर गंभीर आशंका व्यक्त की है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह का लचीला दृष्टिकोण कानूनी ढांचे को कमजोर कर सकता है।
तेलंगाना की स्थिति स्पष्ट है कि वह विभाजन से संबंधित सभी विवादों के समाधान के लिए 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करेगा। राज्य प्रशासन का विचार है कि कानूनी प्रक्रिया ही एकमात्र न्यायसंगत तरीका है और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत सहमति या अनौपचारिक समझौते से बचना चाहिए।
दोनों राज्यों के बीच राजस्व, जल संसाधन, बिजली वितरण और कर्मचारी बंटवारे जैसे मामलों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। तेलंगाना सरकार का दृढ़立场यह है कि इन सभी मुद्दों का निपटारा संविधानिक और कानूनी मानदंडों के अनुरूप होना चाहिए।
राज्य के अधिकारी यह मानते हैं कि द्विपक्षीय वार्ता महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी समझौते का आधार पुनर्गठन अधिनियम और संबंधित कानूनी दस्तावेजों में निहित सिद्धांत होने चाहिए। तेलंगाना सरकार का इस मुद्दे पर कोई समझौता किए बिना अपने अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का इरादा है।