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तेलंगाना गठन के बाद सिंचाई विभाग विलय से नुकसान, विशेषज्ञ पैनल ने सुधार की मांग की
तेलंगाना के गठन के बाद लघु और मुख्य सिंचाई विभागों के विलय से कृषि क्षेत्र को गंभीर नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का पैनल सिंचाई क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार और जलग्रहण सीमाएं तय करने की मांग कर रहा है।
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तेलंगाना राज्य के गठन के पश्चात लघु सिंचाई (एमआई) और मुख्य सिंचाई विभागों के विलय से राज्य की जल प्रबंधन व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों की एक समिति ने इस विलय को विनाशकारी बताते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश की है।
विशेषज्ञ पैनल के अनुसार, विभाग पुनर्गठन में जलग्रहण सीमाओं (एफटीएल) का सुस्पष्ट निर्धारण किया जाना चाहिए। साथ ही, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए कड़े प्रावधान लागू किए जाने आवश्यक हैं। सिंचाई विभाग को पुनः सशक्त करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण परिवर्तन की जरूरत है।
विशेषज्ञों ने जल उपयोगकर्ता संघों (डब्ल्यूयूए) और पंचायत राज संस्थाओं को जल कर वसूल करने की शक्तियां प्रदान करने की अनुशंसा की है। इससे स्थानीय स्तर पर जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। समिति का मानना है कि इन सुधारों से सिंचाई क्षेत्र की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट तेलंगाना सरकार के समक्ष विचाराधीन है। राज्य के जल संसाधन विभाग से इन सिफारिशों पर शीघ्र अमल करने की उम्मीद की जा रही है ताकि सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।