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तेलंगाना उच्च न्यायालय ने डी.एड. परीक्षा में 30% आरक्षण को बरकरार रखा
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने डिप्लोमा इन एजुकेशन (डी.एड.) परीक्षा में विकलांग उम्मीदवारों के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण को वैध ठहराया है। यह निर्णय शैक्षणिक समानता के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
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तेलंगाना उच्च न्यायालय ने द्वितीयक शिक्षा कर्मचारी चयन आयोग (डीएससी) द्वारा 2008 में आयोजित डी.एड. प्रवेश परीक्षा में विकलांग (डिसेबिलिटी) वर्ग के लिए दिए गए 30 प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखने का निर्णय दिया है। न्यायालय ने पाया कि यह आरक्षण नीति संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है और शिक्षा में समान अवसर प्रदान करने के उद्देश्य को पूरा करती है।
उच्च न्यायालय का यह आदेश विकलांग शिक्षार्थियों के हितों की रक्षा करता है और उन्हें शिक्षण पेशे में प्रवेश के समान अधिकार सुनिश्चित करता है। अदालत ने माना कि आरक्षण नीति समाज के सुविधाहीन वर्गों को न्याय प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
यह निर्णय तेलंगाना में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समावेशी नीतियों को लागू करने की प्रतিबद्धता को दर्शाता है। विकलांग परीक्षार्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है।
इस निर्णय से शिक्षा प्रणाली में विविधता और समावेशिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग को अब डी.एड. जैसे अन्य शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी इसी तरह की समावेशी नीतियां लागू करने की आवश्यकता है।