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तेलंगाना POCSO मामलों में सुधार में शीर्ष राज्यों में नहीं आया
तेलंगाना में पिछले दशक में दर्ज 31,117 POCSO मामलों में से 52.54% मुकदमे का इंतजार कर रहे हैं। तेजी से निपटारे के लिए समर्पित अदालतों की कमी इस बड़े बैकलॉग का मुख्य कारण बताई जा रही है।
LSN India ·

तेलंगाना बाल यौन शोषण के मामलों में तेजी से निर्णय लेने के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में से नहीं रहा है। राज्य में बीते दस सालों में दर्ज 31,117 POCSO (बाल यौन उत्पीड़न) मामलों में से आधे से अधिक अभी भी कानूनी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में लंबित हैं।
डेटा से पता चलता है कि कुल मामलों का 52.54% प्रतिशत अभी भी सुनवाई के लिए अदालत की प्रतीक्षा में है। इस विशाल बैकलॉग का प्रमुख कारण राज्य में विशेष तेजी से निपटारे वाली अदालतों की अपर्याप्त संख्या बताई जा रही है। न्याय प्रणाली में इस तरह की देरी से संवेदनशील मामलों में कानूनी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है।
भारतीय कानूनी प्रणाली बाल उत्पीड़न के मामलों में तेजी से कार्रवाई के लिए जिम्मेदार है। हालांकि, संसाधनों की कमी और अदालतों के भारी बोझ के कारण कई राज्य इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों से न्याय तंत्र को सुदृढ़ करने और पीड़ितों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है। विशेष अदालतें स्थापित करना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।