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तेलंगाना: निर्माण अनुमति के समय मलबे का हिसाब देना अब अनिवार्य
तेलंगाना सरकार ने निर्माण परियोजनाओं में उत्पन्न होने वाले मलबे के प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए भवन अनुमति प्रदान करते समय ही इसका विस्तृत हिसाब रखना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम निर्माण अपशिष्ट के अनियंत्रित निपटान से संबंधित समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
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तेलंगाना सरकार के इस नए निर्देश के अनुसार, किसी भी निर्माण परियोजना को मंजूरी देने से पहले निर्माणकर्ताओं को अपेक्षित निर्माण मलबे की मात्रा का विस्तृत विवरण प्रदान करना होगा। इस कदम का उद्देश्य निर्माण अपशिष्ट के नियोजित प्रबंधन को सुनिश्चित करना है और शहरों में अनियंत्रित मलबे की समस्या को कम करना है।
यह नीति निर्माण क्षेत्र में पर्यावरणीय दायित्व को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन करने से शहरी इलाकों में साफ-सफाई बनी रहेगी और पर्यावरणीय गिरावट को रोका जा सकेगा।
यह आदेश सभी आकार की निर्माण परियोजनाओं पर लागू होगा और निर्माण अनुमति प्रदान करने वाले नियामक निकायों को इसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माण मलबे का पूर्व-निर्धारित और व्यवस्थित निपटान शहरी विकास को टिकाऊ बनाने के लिए आवश्यक है।
तेलंगाना के इस कदम से अन्य राज्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित हुआ है, जहां निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार का मानना है कि स्मार्ट शहर विकास के लिए निर्माण अपशिष्ट को संसाधन में परिवर्तित करना आवश्यक है।