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नई संसद भवन में आत्मा नहीं है: शाशी तारोर की आलोचना
कांग्रेस सांसद शाशी तारोर ने नई संसद भवन को 'निर्जीव सम्मेलन केंद्र' करार दिया है। उनका कहना है कि यह भवन राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रतीक है।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शाशी तारोर ने नई संसद भवन की डिजाइन और निर्माण को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। तारोर के अनुसार, यह भवन एक सामान्य सम्मेलन केंद्र जैसा लगता है और इसमें किसी ऐतिहासिक राजनीतिक भवन के लिए जरूरी आत्मीयता और गरिमा का अभाव है।
तारोर ने कहा कि नई संसद भवन की संरचना में एक तरह की दूरी की अनुभूति होती है, जो देश की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण का प्रतीक प्रतीत होती है। उनके अनुसार, यह दूरी संसद के अंदर सदस्यों के बीच मानवीय जुड़ाव को कम करती है।
तारोर का यह विचार पुरानी संसद भवन के ऐतिहासिक महत्व और इसकी आंतरिक संरचना से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। पुरानी संसद भवन में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की वास्तुकला को संरक्षित रखा गया था, जबकि नए भवन की आधुनिक डिजाइन पूरी तरह से भिन्न है।
नई संसद भवन को 2023 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र की नई पहचान स्थापित करना था।