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शashi थारूर ने धुरंधर फिल्मों की आलोचना की, प्रचार तत्वों को बताया समस्या
कांग्रेस नेता शashi थारूर ने धुरंधर फिल्मों में फिल्ममेकिंग और अभिनय की प्रशंसा की है, लेकिन अत्यधिक हिंसा और राजनीतिक संदेशों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि इन फिल्मों में प्रचारणात्मक सामग्री की भरमार है।
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राज्यसभा के सदस्य और लेखक शashi थारूर ने धुरंधर फिल्मों की समीक्षा में फिल्ममेकिंग की गुणवत्ता और अभिनेताओं के प्रदर्शन की सराहना की है। हालांकि, उन्होंने इन फिल्मों में कुछ महत्वपूर्ण खामियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
थारूर के अनुसार, धुरंधर फिल्मों में अत्यधिक हिंसा का चित्रण किया गया है, जो दर्शकों के लिए चिंताजनक है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इन फिल्मों में राजनीतिक संदेशों को लेकर भी सवाल हैं। थारूर के मुताबिक, फिल्मों में प्रचारणात्मक सामग्री की काफी मात्रा देखी जा सकती है।
प्रख्यात राजनेता और साहित्यकार ने आगे कहा कि बुद्धिमत्ता संचालन और गुप्त एजेंसियों के कार्यों का चित्रण भी संदेहास्पद है। उनकी राय में, इस तरह की सामग्री का फिल्मों में चित्रण जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
थारूर की यह समीक्षा दर्शाती है कि भारतीय समीक्षकों द्वारा कैसे आधुनिक सिनेमा में राजनीतिक और सामाजिक आयामों को लेकर गहन विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने माना कि तकनीकी दृष्टि से फिल्में उच्च कोटि की हैं, लेकिन सामग्री में संतुलन की कमी है।