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देवी दुर्गा की प्रतिमा में बिंदी के नीचे मकड़ी का प्रतीकात्मक महत्व

दुर्गा पूजा की परंपरागत प्रतिमाओं में देवी के माथे पर बिंदी के नीचे मकड़ी और उसके जाल का चित्रण देखा जाता है। इस प्रतीकवाद के पीछे एक गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थ छिपा है।

LSN India · 18 October 2026

देवी दुर्गा की प्रतिमा में बिंदी के नीचे मकड़ी का प्रतीकात्मक महत्व

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष देवी की प्रतिमा का विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा, जिस दिन श्रद्धालु गहरी भावनाओं के साथ देवी को जलों में विदा करते हैं और अगले वर्ष उनके आगमन की कामना करते हैं।

दुर्गा पूजा की कई पारंपरिक प्रतिमाओं में एक विशेष तत्व देखा जाता है - देवी के माथे पर लगी बिंदी के नीचे मकड़ी और उसका जाल बनाया जाता है। यह कलात्मक विवरण केवल एक सजावटी तत्व नहीं, बल्कि हिंदू धार्मिक संस्कृति में गहरे अर्थ को प्रकट करता है।

शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, मकड़ी और उसका जाल सृष्टि की रचना का प्रतीक माने जाते हैं। मकड़ी के जाल को ब्रह्मांड की संरचना की तरह देखा जाता है, जहां सब कुछ परस्पर जुड़ा हुआ है। इस प्रतीकवाद से यह संदेश मिलता है कि देवी दुर्गा संपूर्ण सृष्टि की निर्मात्री और संरक्षक हैं।

धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि मकड़ी अपने जाल के माध्यम से शिकार को फंसाती है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। देवी के माथे पर इस चिह्न का अर्थ है कि दुर्गा बुरी शक्तियों को नष्ट करने और धर्म की स्थापना करने वाली शक्ति हैं। यह परंपरागत प्रतिमाकला का एक अभिन्न अंग है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखता है।