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खाद सहायता के लिए नकद हस्तांतरण का समर्थन, कृषि डेटा को लेकर सतर्कता बरते: आईसीआरआईईआर
भारतीय अनुसंधान संस्थान की रिपोर्टों ने खाद सब्सिडी के स्थान पर सीधे नकद हस्तांतरण की वकालत की है। साथ ही, कृषि डेटा स्टैक के उपयोग में सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है।
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भारतीय अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईईआर) की नई रिपोर्टें कृषि क्षेत्र में सरकारी सहायता प्रणाली को पुनर्गठित करने का आह्वान कर रही हैं। इन विश्लेषणों में खाद सब्सिडी के मौजूदा तंत्र की जगह नकद हस्तांतरण प्रणाली अपनाने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो सकता है।
आईसीआरआईईआर के शोधपत्रों में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह सामने आया है कि पंजाब और हरियाणा को केंद्र सरकार की ओर से उनके कृषि उत्पादन के मुकाबले काफी अधिक सहायता प्राप्त होती है। यह राशि अधिकांश अन्य राज्यों की तुलना में असमानुपातिक रूप से बड़ी है। इस असंतुलन पर नियंत्रण की जरूरत है।
शोध दस्तावेजों में कृषि डेटा प्रबंधन प्रणाली, जिसे कृषि स्टैक के नाम से जाना जाता है, के व्यापक उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण सावधानियां व्यक्त की गई हैं। विशेषज्ञों का मत है कि किसानों की निजता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस प्रणाली को सावधानीपूर्वक संचालित किया जाना चाहिए।
आईसीआरआईईआर की सुझावें नीति निर्माताओं को सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता लाने और भारत के विभिन्न कृषि क्षेत्रों के बीच न्यायसंगत समर्थन सुनिश्चित करने का मार्ग दिखाती हैं। ये अनुशंसाएं कृषि नीति में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।