LSN News › India

Business · India Bureau

तिरुवनंतपुरम के तटों पर मसल्स की कटाई से जीविका का सहारा

तिरुवनंतपुरम के चट्टानी तटीय क्षेत्रों में मसल्स की कटाई सितंबर से फरवरी तक चरम पर रहती है। यह समुद्री संपदा स्थानीय गोताखोर समुदाय के लिए जीविका का प्रमुख स्रोत बन गई है।

LSN India · 5 November 2026

तिरुवनंतपुरम के तटों पर मसल्स की कटाई से जीविका का सहारा

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के तटीय इलाकों में मसल्स यानी खोल वाली मछलियों की कटाई समुद्र से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका चलाती है। विझिंजम, कोवलम, अझिमाला, पूंथुरा और मुथलप्पोझी समेत निकटवर्ती गांवों से निकाली जाने वाली इन मसल्स को शहर के बाजारों और रेस्तरांओं तक पहुंचाया जाता है।

सितंबर से फरवरी तक का मौसम मसल्स की कटाई के लिए सबसे अनुकूल होता है। इसी दौरान चट्टानी तटों से निकाली गई मसल्स नीलाम में सर्वाधिक दाम प्राप्त करती हैं। स्थानीय बाजारों में इन मसल्स की कीमत 15,000 रुपये तक जा सकती है।

गोताखोर समुदाय का सीधा संबंध समुद्र की मौसमी पैदावार से है। लहरों की मार और मौसम की मार झेलते हुए ये समुदाय चट्टानों से मसल्स निकालते हैं और उन्हें व्यवसायिक नेटवर्क के माध्यम से बिक्री के लिए तैयार करते हैं। यह परंपरागत व्यवसाय पीढ़ियों से चला आ रहा है।

तिरुवनंतपुरम के तटीय इलाकों के लिए मसल्स की कटाई न केवल आर्थिक गतिविधि है, बल्कि समुद्री संसाधनों के टिकाऊ उपयोग का एक उदाहरण भी है। स्थानीय बाजारों से लेकर शहर के उच्च श्रेणी के रेस्तरांओं तक पहुंचने वाली इन मसल्स ने इस क्षेत्र में एक सुस्थापित आपूर्ति श्रृंखला विकसित की है।