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जंतर मंतर प्रदर्शन से पहले हजारों को रेलगाड़ियों से उतारा गया: वामपंथी और सीजेपी
केंद्रीय जेल प्राधिकारी और वामपंथी दलों का दावा है कि जंतर मंतर में बड़े प्रदर्शन से पहले हजारों कार्यकर्ताओं को रेलगाड़ियों से उतारकर हिरासत में लिया गया। यह कदम सरकार द्वारा विरोध प्रदर्शन को दबाने की रणनीति माना जा रहा है।
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राजधानी में होने वाले जंतर मंतर 2.0 प्रदर्शन को रोकने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। दिल्ली के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर पुलिस दलों ने आने वाले प्रदर्शनकारियों को रोका और उन्हें हिरासत में ले लिया। वामपंथी पार्टियों और नागरिक अधिकार संगठनों के अनुसार, इस प्रक्रिया में हजारों लोग प्रभावित हुए हैं।
यह कार्रवाई गत वर्षों के किसान आंदोलन से अलग है, जहां जंतर मंतर सैकड़ों किसानों के एकत्रीकरण का केंद्र बना था। इस बार की व्यापक गिरफ्तारियों को सरकार द्वारा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का उपाय बताया जा रहा है, जबकि विरोधी पक्ष इसे नागरिक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं।
दिल्ली पुलिस ने अभी तक हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। हालांकि, स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के नाम पर व्यापक तलाशी अभियान चलाए गए।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई की निंदा की है और इसे असंवैधानिक बताया है। उन्होंने सरकार से हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों को तुरंत रिहा करने की मांग की है और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।