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दही हांडी 2026: मुंबई में हजारों गोविंदाओं ने बनाई मानव श्रृंखलाएं
जन्माष्टमी की खुशियों के बीच मुंबई और आसपास के शहरों में हजारों गोविंदाओं ने मानव पिरामिड बनाकर दही से भरे घड़ों को तोड़ा। यह पारंपरिक उत्सव भक्तों के साहस और कृष्ण भक्ति का प्रतीक है।
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शनिवार को मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में दही हांडी का त्यौहार परंपरागत रूप से मनाया गया। लालबाग, दादर जैसी संकरी गलियों से लेकर ठाणे के विशाल आयोजन स्थलों तक, नगर भर में ढोलों की थाप गूंजती रही। युवा गोविंदों की टीमें, जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल थीं, महीनों की कठोर मेहनत को परखने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुंचीं। लाखों रुपये के इनाम जीतने की लालसा में वे दस मंजिल तक ऊंचे मानव पिरामिड बनाने का दुस्साहस दिखाते हैं।
भर्ती समाजों, चौराहों और खुली जमीनों पर फूलों और गुब्बारों से सजे सैकड़ों घड़े लगाए गए थे। ये घड़े दही से भरे हुए थे और जमीन से कई मीटर की ऊंचाई पर लटकाए गए थे। यह परंपरा भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर जन्माष्टमी के त्यौहार का अभिन्न अंग है।
गोविंदाओं की टीमें एक-दूसरे के कंधों पर चढ़ते हुए ऊंचाई तक पहुंचने का प्रयास करती हैं, जहां उन्हें मिट्टी के बर्तन को तोड़ना होता है। इस पारंपरिक खेल में हड्डियों के टूटने का खतरा रहता है, लेकिन यह भक्ति और साहस की परीक्षा माना जाता है। मुंबई के विभिन्न इलाकों में ये आयोजन रात के बाद से ही शुरू हो गए थे।
दही हांडी जन्माष्टमी के उत्सवों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। इस बार के आयोजन में हजारों भाग लेने वाले अपने कौशल और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करते नजर आए।