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तिरुपति के जल भंडार केवल 90 दिन तक चल सकते हैं
वर्षा की कमी से जूझ रहे तिरुमला में जल संकट गहराता जा रहा है। पाँच जलाशयों में से तीन सूख चुके हैं और अधिकारियों की आशा अब उत्तरपूर्वी मानसून पर ही टिकी है।
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तिरुमला शहर में जल संकट की स्थिति गंभीर हो गई है। शहर प्रतिदिन लगभग 60 लाख गैलन पानी की खपत करता है, जबकि वर्तमान में जल भंडार मात्र 90 दिनों तक ही पर्याप्त हैं। वर्षा की कमी के कारण स्थिति और भी विकट हो गई है।
शहर के पाँच जलाशयों में से तीन पहले ही सूख चुके हैं। शेष दोनों जलाशयों में भी जल स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जल उपयोग को कम करने के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
इस संकट से निपटने के लिए प्रशासन की एकमात्र उम्मीद उत्तरपूर्वी मानसून है। अधिकारियों का मानना है कि यदि आने वाले मानसून में पर्याप्त वर्षा हो तो जल भंडार को पुनः भरने में मदद मिलेगी। हालांकि, जलवायु पूर्वानुमान में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
तिरुमला के धार्मिक महत्व और पर्यटकों के आने-जाने को देखते हुए जल संकट की स्थिति चिंताजनक है। प्रशासन ने आने वाले हफ्तों में स्थिति की समीक्षा करने की योजना बनाई है ताकि समय से उचित कदम उठाए जा सकें।