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तिरुपति में गणेश मूर्तियों के लिए पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने का आह्वान
तिरुपति प्रशासन ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल गणेश मूर्तियों का उपयोग करने की अपील की है। इस कदम का लक्ष्य मूर्ति विसर्जन के समय जलाशयों में होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
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तिरुपति के प्राधिकारियों ने आने वाले गणेश चतुर्थी त्योहार को देखते हुए पारंपरिक मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों से बनी गणेश मूर्तियों का उपयोग करने के लिए जनता का आह्वान किया है। इस पहल के माध्यम से शहर में पर्यावरणीय स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन ने सलाह दी है कि रासायनिक रंगों और प्लास्टिक से बनी मूर्तियों का उपयोग न किया जाए, जिससे मूर्ति विसर्जन के समय जल प्रदूषण की समस्या को रोका जा सके। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, परंपरागत तरीके से तैयार की गई मिट्टी की मूर्तियां पूरी तरह जैव-निम्नीकरण योग्य होती हैं और पानी की गुणवत्ता को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।
तिरुपति के मंदिर शहर के रूप में प्रसिद्ध होने के कारण, यहां गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। प्रशासन ने स्थानीय कारीगरों को पर्यावरण अनुकूल मूर्तियां बनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है ताकि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा दिया जा सके।
नगर पालिका के अधिकारियों ने नागरिकों से यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया है कि मूर्ति विसर्जन के लिए निर्धारित स्थानों का ही उपयोग किया जाए और किसी भी प्रकार का कचरा सार्वजनिक जल निकायों में न डाला जाए।