Business · India Bureau
टोकनाइजेशन से छिपी संपत्ति सामने आएगी, कर्ज की लागत घटेगी
डिजिटल संपत्ति प्रबंधन के जरिए सोना, बांड और संपत्ति को आसानी से सुलभ बनाया जा सकता है। इससे ऋण देने में संपार्श्विक के तौर पर इस्तेमाल करना भी आसान हो जाएगा।
LSN India ·

डिजिटल परिसंपत्ति प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि टोकनाइजेशन तकनीक भारत की अर्थव्यवस्था में छिपी हुई संपत्ति को सक्रिय करने की क्षमता रखती है। इस प्रौद्योगिकी के माध्यम से सोना, बांड और अचल संपत्ति जैसी परंपरागत संपत्तियों को डिजिटल रूप में विभाजित और हस्तांतरित किया जा सकता है।
टोकनाइजेशन का एक प्रमुख लाभ यह है कि यह उधारकर्ताओं को अपनी संपत्तियों को संपार्श्विक के रूप में अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग करने में मदद करता है। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो जाती है। परिणामस्वरूप, उधारकर्ता कम ब्याज दरों पर कर्ज प्राप्त कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, टोकनाइजेशन से वित्तीय समावेशन भी बढ़ेगा क्योंकि छोटे निवेशक पहले अप्राप्य संपत्तियों तक पहुंच सकेंगे। यह तकनीक आर्थिक वृद्धि को गति देते हुए बाजार की दक्षता में भी सुधार लाने में सहायक हो सकती है। हालांकि, विनियमन और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना इस संभावना को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है।