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सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों की दिल्ली मार्च को रोकने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र पर भड़ास निकालने के लिए पीड़ितों के 5 सितंबर को दिल्ली मार्च पर प्रतिबंध लगाने से मना कर दिया है। अदालत ने सभी से जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से कार्य करने की अपेक्षा की है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संघीय सत्ता को जवाबदेह ठहराने वाली याचिकाकर्ताओं के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने 36 दिन के अशांति के बाद परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर अपना आंदोलन स्थगित करने के लिए केंद्र सरकार के साथ 25 जुलाई को किए गए समझौते का पालन न किए जाने का आरोप लगाया था।
याचिकाकर्ताओं का मानना है कि सरकार ने अपने वादों को पूरा नहीं किया, जिसके कारण उन्होंने 5 सितंबर को दिल्ली में एक विरोध मार्च का आह्वान किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मार्च को रोकने की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों को अपनी चिंताएं व्यक्त करने का अधिकार है।
अदालत ने सभी पक्षों से आशा की है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन एक जागरूक और संतुलित तरीके से करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग कानून का पालन करते हुए किया जाना चाहिए।
यह फैसला राजनीतिक दबाव और सार्वजनिक असंतोष के बीच आया है, जहां परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की मांग जोर पकड़ रही है। सरकार से की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की मांग अब और जोरदार हो गई है।