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बिजली क्षेत्र में ठेका कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कानून की मांग
भारतीय मजदूर संघ के नेताओं का आरोप है कि सरकार अपने विभागों में ठेका और आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों का शोषण कर रही है। यह काम स्थायी प्रकृति के हैं लेकिन कर्मचारियों को स्थायी सुविधाएं नहीं दी जा रहीं।
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भारतीय कम्युनिस्ट ट्रेड यूनियन फेडरेशन के राज्य महासचिव और कर्नाटक राज्य विद्युत कर्मचारी संघ के मानद अध्यक्ष ने सरकार की नीतियों पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता माना जाता है, लेकिन वह अपने विभागों में बड़े पैमाने पर ठेका और आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों का शोषण कर रही है।
इन कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार के कार्यों पर नियुक्त किया जा रहा है, जिनमें से कई स्वभाव से स्थायी हैं। हालांकि, उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान नहीं की जा रही है। यह स्थिति श्रम कानूनों और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
श्रमिक संगठन इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए विधायी सुधार की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सरकार ऐसे कानूनों का निर्माण करे जो ठेका कर्मचारियों को नियमित रूप से नियुक्त करने का रास्ता खोलें। इससे न केवल इन कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि श्रम बाजार में भी स्थिरता आएगी।
बिजली क्षेत्र में कार्यरत लाखों ठेका कर्मचारियों के हितों को देखते हुए यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण है। संघ का कहना है कि यदि सरकार सच में एक अच्छा नियोक्ता बनना चाहती है तो उसे इन कर्मचारियों के साथ न्यायसंगत व्यवहार करना चाहिए और उन्हें समान अधिकार प्रदान करने चाहिए।