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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रेड यूनियनों का तीव्र विरोध
सीआईटीयू के महासचिव एलामारम करीम ने कहा कि विधायिका और न्यायपालिका दोनों ही संविधान द्वारा प्रदत्त श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहे हैं।
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भारतीय ट्रेड यूनियनों ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया निर्णय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें 'उद्योग' की परिभाषा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया गया है। इस निर्णय को श्रमिकों के मौलिक अधिकारों के लिए खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (सीआईटीयू) के महासचिव एलामारम करीम ने कहा कि यह फैसला श्रमिकों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा झटका है। उन्होंने आलोचना करते हुए बताया कि संविधान द्वारा प्रदत्त कल्याणकारी प्रावधानों की रक्षा करने की जिम्मेदारी विधायिका और न्यायपालिका दोनों की है, लेकिन दोनों ने इस मामले में विफल साबित हुई हैं।
इंडस्ट्री की परिभाषा में परिवर्तन से असंगठित और छोटे क्षेत्र के श्रमिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। ट्रेड यूनियनें मानती हैं कि इस फैसले से श्रमिकों को उनके हक से वंचित किया जा सकता है और काम की परिस्थितियां और भी खराब हो सकती हैं।
श्रमिक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लें और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएं। इस घटनाक्रम को भारत की श्रमिक नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।