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प्राचीन बाड़ बनाने की कला का पुनरुत्थान: 2,500 किसान जलवायु संरक्षण में जुटे
ब्रिटेन के किसान सरकारी अनुदान का लाभ उठाकर 1,300 किलोमीटर लंबी पारंपरिक बाड़ों को पुनर्जीवित कर रहे हैं। यह प्राचीन कृषि पद्धति बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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एक हजार तीन सौ साल पुरानी बाड़ बनाने की तकनीक वर्तमान समय में कृषि और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई जान फूंक रही है। लगभग 2,500 किसान इस पारंपरिक विधि को अपनाकर विशाल क्षेत्र में हेजरो का विस्तार कर रहे हैं, जिससे दीर्घकाल से उपेक्षित इस कला को नया महत्व मिल रहा है।
सरकारी वित्तीय सहायता के माध्यम से किसान परिपक्व बाड़ों को पुनः स्थापित कर रहे हैं। ये हेजरो केवल सजावट का काम नहीं करते, बल्कि बाढ़ की रोकथाम में भी प्रभावी साबित हो रहे हैं। पारंपरिक बाड़ें प्राकृतिक जल निकासी तंत्र का काम करती हैं और अत्यधिक वर्षा के दौरान भूमि में जल संचयन में सहायक होती हैं।
जैव विविधता के संरक्षण में भी ये हेजरो महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। ये पौधे पक्षियों, कीटों और छोटे स्तनपायियों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं। साथ ही, ये घने पौधे वातावरण से कार्बन को अवशोषित करने में अत्यंत कारगर हैं।
कृषि विशेषज्ञ इस पुनरुत्थान को जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं। परंपरागत कृषि पद्धतियों का आधुनिक संदर्भ में पुनरुद्धार न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि कर सकता है।