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इंटरकनेक्ट विलंब के लिए ट्राई ने लगाया प्रति सर्किल 1 करोड़ तक जुर्माना
भारतीय दूरसंचार नियामक ने इंटरकनेक्शन उल्लंघन के लिए क्रमबद्ध दंड का परिचय दिया है। जनवरी 2027 से IP-आधारित इंटरकनेक्शन में संक्रमण अनिवार्य किया गया है।
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दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने इंटरकनेक्शन देरी को लेकर सख्ट रुख अपनाते हुए कठोर दंड व्यवस्था को लागू किया है। नई नीति के तहत ऑपरेटरों को प्रत्येक सर्किल में 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह कदम दूरसंचार सेवाओं में गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ट्राई ने इंटरकनेक्शन नियमों में संशोधन करके उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार क्रमबद्ध दंड निर्धारित किए हैं। इससे ऑपरेटरों को समय पर कनेक्शन सुविधा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। नियामक का मानना है कि यह व्यवस्था नेटवर्क अवसंरचना में सुधार लाएगी।
इसके साथ ही ट्राई ने IP-आधारित इंटरकनेक्शन की ओर संक्रमण के लिए एक चरणबद्ध समय सारणी निर्धारित की है। जनवरी 2027 से सभी ऑपरेटरों को IP तकनीक अपनाना अनिवार्य हो जाएगा। यह आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाकर दूरसंचार क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने का प्रयास है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञ इस निर्णय को दूरसंचार सेवाओं में गुणात्मक सुधार के लिए सकारात्मक कदम मानते हैं। IP-आधारित तकनीक से बेहतर कनेक्टिविटी और कम लागत की संभावना है। ट्राई का यह नीति सभी ऑपरेटरों के लिए समान मानदंड स्थापित करता है और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करता है।