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ओडिशा में जनजातीय विकास परिषदें निष्क्रिय, उपाध्यक्षों का आरोप
ओडिशा के 23 जिलों में स्थापित जनजातीय विशेष विकास परिषदें अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रह रही हैं। इन परिषदों के उपाध्यक्षों ने कहा है कि 64 जनजातीय समुदायों की संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने के लिए बनाई गई ये संस्थाएं वास्तविक रूप से कार्य नहीं कर रही हैं।
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ओडिशा में जनजातीय समुदायों के विकास के लिए गठित विशेष विकास परिषदें (एसडीसी) अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम साबित हुई हैं। राज्य के 23 जिलों में स्थापित इन परिषदों के उपाध्यक्षों ने प्रशासनिक अड़चनों और संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए कहा है कि परिषदें व्यावहारिक स्तर पर निष्क्रिय बनी हुई हैं।
ये परिषदें राज्य की 64 जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और उनकी विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से स्थापित की गई थीं। राज्य में लगभग 84 लाख की आबादी वाली ये जनजातीय आबादी विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
उपाध्यक्षों के अनुसार, परिषदों को समुचित बजट आवंटन, कर्मचारी और तकनीकी सहायता न मिलने के कारण वे अपनी मूल जिम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ रहे हैं। ये निकाय जनजातीय समुदायों के सामाजिक विकास, शिक्षा और आजीविका संबंधी योजनाओं को लागू करने के लिए गठित थे।
हालांकि, यह मामला ओडिशा सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है कि ये संस्थाएं अपनी स्थापना के बाद से वास्तविक जमीनी कार्य करने में सफल नहीं हो पाई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिषदों को कार्यरत करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप और संसाधनों में वृद्धि की आवश्यकता है।