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गोंडवाना विश्वविद्यालय में माओवादी नेता की नियुक्ति को आदिवासियों का विरोध
गोंडवाना विश्वविद्यालय में समन्वयक के पद पर एक पूर्व माओवादी नेता की नियुक्ति को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। आदिवासी नेताओं का आरोप है कि इस व्यक्ति ने अतीत में जनजातीय समुदाय को धोखा दिया है।
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गोंडवाना विश्वविद्यालय की एक नई नियुक्ति को लेकर आदिवासी समुदाय में व्यापक असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा एक पूर्व माओवादी नेता को समन्वयक के रूप में नियुक्त किया गया है, जिसके खिलाफ स्थानीय जनजातीय नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।
आदिवासी समूहों के अनुसार, इस व्यक्ति की पृष्ठभूमि को देखते हुए ऐसी नियुक्ति उचित नहीं है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अतीत में आदिवासियों को धोखा दिया है, उसे अब जनजातीय समुदाय के बीच जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी देना एक विडंबना है।
आदिवासी नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय को ऐसे व्यक्तियों को नियुक्त करना चाहिए जिनके विरुद्ध आदिवासी समुदाय का विश्वास न टूटा हो।
यह मामला जनजातीय समुदाय और शैक्षणिक संस्थानों के बीच विश्वास के मुद्दों को उजागर करता है। विश्वविद्यालय प्रशासन से अब इस विरोध पर अपनी प्रतिक्रिया देने की प्रतीक्षा की जा रही है।