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आदिवासी महिलाओं के लिए मासिक धर्म आश्रय की कमी से स्वास्थ्य संकट
आदिवासी इलाकों में लगभग 100 महिलाओं और किशोरियों के लिए केवल एक वालैम्पुरा उपलब्ध है जिसकी स्थिति बेहद खराब है। इससे महिलाओं को स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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आदिवासी बहुल इलाकों में मासिक धर्म के समय महिलाओं और किशोरियों के लिए स्वच्छ आश्रय सुविधाओं की भारी कमी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है। जहां लगभग 100 महिलाएं और किशोरियां रहती हैं, वहां केवल एक वालैम्पुरा की व्यवस्था है, जिसकी स्थिति अत्यंत दयनीय है।
वालैम्पुरा वह पारंपरिक आश्रय है जहां आदिवासी समुदायों में मासिक धर्म वाली महिलाओं को अलग रखा जाता है। अस्वच्छ और अपर्याप्त सुविधाओं के कारण ये आश्रय न केवल गरिमा की कमी को दर्शाते हैं, बल्कि संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण भी बन रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की असुविधाजनक परिस्थितियों में महिलाएं संक्रामक रोगों, त्वचा संक्रमण और प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो रही हैं। आधुनिक सुविधाओं और सुधार की तत्काल आवश्यकता है ताकि इन महिलाओं को गरिमापूर्ण परिस्थितियों में जीवन जीने का अधिकार मिल सके।