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ईरान पर आर्थिक दबाव के लिए अमेरिका सहयोगियों और चीन को मनाने में जुटा
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की टिप्पणियों से जाहिर हो रहा है कि ट्रम्प प्रशासन तेहरान पर सैन्य दबाव की जगह आर्थिक रणनीति अपना रहा है। छह महीने तक चली इस विवादास्पद नीति के तहत वाशिंगटन अपने सहयोगियों और चीन को भी इसमें शामिल करना चाहता है।
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अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक रणनीति को मजबूत करने के लिए मित्र राष्ट्रों और चीन को साथ लाने का प्रयास कर रहा है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की हालिया टिप्पणियां दर्शाती हैं कि ट्रम्प सरकार सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव को प्राथमिकता दे रही है।
इस रणनीति परिवर्तन के बीच अमेरिका अपने पारंपरिक सहयोगियों को ईरान पर प्रतिबंध और आर्थिक नीतियों में सहयोग करने के लिए राजी करना चाहता है। साथ ही, वाशिंगटन बीजिंग को भी इस कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है। यह कदम ईरान के साथ अमेरिकी रिश्तों में एक नए चरण का संकेत देता है।
विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य विकल्प की तुलना में आर्थिक दबाव अधिक टिकाऊ और व्यापक समर्थन प्राप्त करने वाली रणनीति साबित हो सकती है। इस पद्धति से अमेरिका बहुपक्षीय सहमति के माध्यम से ईरान पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत जैसे देशों के लिए यह विकास महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान के साथ आर्थिक संबंध क्षेत्रीय राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। अमेरिकी नीति में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार संबंधों पर व्यापक असर डाल सकता है।