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ट्रम्प का न्यायाधीशों पर हमला, डाक मतपत्र मामले में करार खाया
सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रम्प की डाक मतपत्र योजना को सीमित करने के आदेश को निरस्त करने की अपील को खारिज कर दिया है। नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले यह फैसला उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक महत्वपूर्ण हार दी है। न्यायालय ने डाक मतपत्र मतदान को सीमित करने की उनकी योजना पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग को खारिज कर दिया है। यह फैसला आने वाले नवंबर के मध्यावधि चुनावों से कुछ समय पहले आया है।
ट्रम्प ने इस निर्णय के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने न्यायाधीशों की आलोचना करते हुए कहा है कि ये वे लोग नहीं हैं जिनसे वह अपने अभियान के दौरान मिले थे। उनका आरोप है कि न्यायालय ने उनकी डाक मतपत्र योजना के विरुद्ध पक्षपातपूर्ण रुख अपनाया है।
डाक मतपत्र प्रणाली को लेकर ट्रम्प के विचार स्पष्ट हैं। वह मानते हैं कि यह व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का कारण बन सकती है। उनकी पार्टी डाक मतपत्र को सीमित करने के उपायों का समर्थन करती है।
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय डाक मतपत्र मतदान के अधिकार को संरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का यह फैसला संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित है।