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ट्रंप का दावा: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी दबाव से बचा मध्य पूर्व
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके कठोर रुख के कारण ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सका। विश्लेषकों का कहना है कि इस दावे की वास्तविकता जटिल और विवादास्पद है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्होंने अपने कार्यकाल में ईरान पर कठोर प्रतिबंध न लगाए होते, तो परमाणु हथियार से लैस ईरान मध्य पूर्व में विनाशकारी परिस्थितियां पैदा कर देता। उन्होंने इसरायल और क्षेत्रीय शांति के लिए अपने प्रशासन के कदमों को महत्वपूर्ण बताया।
ट्रंप प्रशासन ने 2018 में अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते से अलग हटकर ईरान पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लागू किए थे। अमेरिका का तर्क था कि यह समझौता अपर्याप्त था और ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह नियंत्रित नहीं करता था।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट और विश्लेषकों के अध्ययन से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति पर अलग-अलग निष्कर्ष निकलते हैं। विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि प्रतिबंधों का असर पड़ा, जबकि दूसरा पक्ष सवाल उठाता है कि क्या ईरान वास्तव में परमाणु हथियार बनाना चाहता था।
ट्रंप के बाद अमेरिकी प्रशासन ने 2021 में परमाणु समझौते में लौटने का प्रयास किया, लेकिन आपसी मतभेदों के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। मध्य पूर्व की परमाणु नीति को लेकर अमेरिकी नीति में बदलाव जारी है।