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भारत-पाकिस्तान शांति के लिए ट्रम्प को नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था
डोनल्ड ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम में अपनी भूमिका को नोबेल पीस प्राइज के लिए पर्याप्त बताया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति पर उन्होंने 2026 का सम्मान नवी पिल्लै को देने के लिए आलोचना की है।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि भारत-पाकिस्तान विवाद को सुलझाने में उनका योगदान अकेले ही उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने के लिए पर्याप्त था। ट्रम्प की इस टिप्पणी का संदर्भ नॉर्वेजियन नोबेल समिति के 2026 के नोबेल पीस प्राइज का ऐलान है, जो अंतर्राष्ट्रीय न्यायविद् नवी पिल्लै को दिया गया है।
ट्रम्प ने इस निर्णय की तीव्र आलोचना की है और अपने राजनयिक प्रयासों को इस सम्मान के लिए अधिक योग्य बताया है। उन्होंने दक्षिण एशिया में शांति स्थापन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।
नवी पिल्लै, जो मानवाधिकार आयोग की पूर्व प्रमुख हैं, को मानवाधिकार और अंतर्राष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। नोबेल समिति के फैसले पर विभिन्न राजनीतिक हलकों से प्रतिक्रियाएं आई हैं।
भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर अमेरिकी हस्तक्षेप का इतिहास काफी जटिल रहा है। ट्रम्प की मौजूदा टिप्पणी क्षेत्रीय शांति के राजनयिक प्रयासों को लेकर चल रहे विमर्श का हिस्सा है।