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ट्रम्प ने शी को बराबरी का दर्जा दिया, सहयोगी चिंतित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीनी नेता शी जिनपिंग को एक समकक्ष शक्ति के रूप में स्वीकार किया है, जिससे अमेरिका के एशियाई सहयोगियों और आलोचकों में चिंता बढ़ी है।
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ट्रम्प के इस रुख से क्षेत्र के भू-राजनीतिक संतुलन में बदलाव की संभावना दिख रही है। चीन को एक समान दर्जे वाली शक्ति मानने से अमेरिकी विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। यह दृष्टिकोण भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख सहयोगी देशों को असहज कर रहा है।
एशियाई क्षेत्र के देश लंबे समय से अमेरिकी नेतृत्व में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर निर्भर रहे हैं। ट्रम्प का यह बयान इस रणनीतिक समझ को चुनौती देता है और चीन के बढ़ते प्रभाव को वैधता देने की आशंका पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के ढांचे को कमजोर कर सकता है।
आलोचकों का तर्क है कि शी के साथ समान रुख अपनाने से लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों की चिंताएं पृष्ठभूमि में चली जा सकती हैं। चीन की विस्तारवादी नीतियों के प्रति यह नरम रुख क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। भारत समेत कई देश इस विकास पर अपनी प्रतिक्रिया तय करने के लिए प्रतीक्षा में हैं।
आने वाले महीनों में इस नीतिगत बदलाव के व्यापक परिणाम सामने आने की उम्मीद है। अमेरिकी नीति में यह बदलाव भारत-प्रशांत क्षेत्र की शक्ति संतुलन को नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने वाला साबित हो सकता है।