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ट्रम्प की विदेश नीति: दोस्तों को धमकाना, दुश्मनों को गले लगाना
अमेरिकी राष्ट्रपति की सहयोगी देशों के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया और प्रतिद्वंद्वी देशों के प्रति जुड़ाव एक नई रणनीति को दर्शाता है। यह दृष्टिकोण पिछले दशक की राजनीतिक उथल-पुथल का परिणाम माना जा रहा है।
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वर्तमान अमेरिकी प्रशासन की विदेश नीति पारंपरिक कूटनीति के नियमों को उलट देती दिख रही है। ओमान, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसे ऐतिहासिक सहयोगी देशों के प्रति आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है, जबकि उत्तर कोरिया जैसी वैश्विक चिंता के विषय को वार्ता और सहयोग का अवसर माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति अचानक नहीं आई है। पिछले दशक में अमेरिकी राजनीति में व्यापक परिवर्तन देखे गए हैं जो इस नई दिशा की तैयारी कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के क्षेत्र में यह व्यावहारिकता और पुनर्मूल्यांकन का परिचायक माना जा रहा है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इस नीति के महत्वपूर्ण प्रभाव देखे जा सकते हैं। दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख सहयोगी देश के साथ तनाव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। साथ ही, उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का रुख भी अपेक्षाकृत नरम बना दिया गया है।
इस नीति के प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह संकेत देता है कि अमेरिकी विदेश नीति अब अधिक लेनदेनपूर्ण और व्यावहारिक हो गई है। यह दृष्टिकोण वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतिनिधित्व करता है जहां परंपरागत गठबंधन और शत्रुता की अवधारणा पुनर्परिभाषित हो रही है।