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हैदराबाद के गोलकुंडा किले में सुरंग की खोज से मचा रोमांच
500 साल पुराने गोलकुंडा किले में एक रहस्यमय सुरंग की खोज ने इतिहास प्रेमियों और पुरातत्ववेत्ताओं को उत्साहित कर दिया है। किले से चारमीनार, गोशामहल और अन्य ऐतिहासिक स्थलों तक जाने वाली गुप्त सुरंगों की पुरानी कहानियां अब नई रोशनी में आ रही हैं।
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हैदराबाद का गोलकुंडा किला कई सदियों से शहर की ऐतिहासिक विरासत का केंद्र रहा है। काकातीय और कुतुब शाही राजवंशों के दौरान निर्मित यह विशाल किला अपनी अद्भुत वास्तुकला और गहन इतिहास के लिए जाना जाता है।
किले की संरचना में कई स्तर हैं और यह समय के साथ कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों से गुजरा है। इसकी जटिल डिजाइन और बहुआयामी निर्माण के कारण यह स्थान हमेशा से शोधार्थियों का ध्यान आकर्षित करता रहा है।
दशकों से इस किले से जुड़ी विभिन्न गुप्त सुरंगों और मार्गों के बारे में कहानियां प्रचलित हैं। माना जाता है कि ये सुरंगें किले को चारमीनार, गोशामहल, चौमहल्ला पैलेस और नवाब पहाड़ जैसे शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों से जोड़ती थीं। अब हाल में हुई एक सुरंग की खोज से इन ऐतिहासिक दावों की सत्यता की पुष्टि होने के संकेत मिल रहे हैं।
इस खोज से इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के बीच नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन सुरंगों का विस्तृत अध्ययन गोलकुंडा किले के प्राचीन नेटवर्क और शहर की ऐतिहासिक योजना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकता है।