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चेन्नई की सड़कों पर साइकिल और मोटरसाइकिल का राज कैसे हुआ
1880 के दशक में चेन्नई पहुंची साइकिलें शुरुआत में मामूली रहीं, लेकिन बाद में मोटरसाइकिलों ने शहर की गलियों पर अपना प्रभाव जमा लिया। आज भी दोपहिया वाहन शहर में परिवहन का सबसे सुविधाजनक माध्यम बने हुए हैं।
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चेन्नई में साइकिलों का आगमन 1880 के दशक में हुआ था। उस समय इन पेडल-चालित वाहनों की शुरुआत मामूली थी, लेकिन साइकिल सवारों के लिए अलग से सड़क मार्ग बनाने की मांग भी उठी थी। स्थानीय निवासियों के बीच इस नई तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे बढ़ी थी।
जैसे-जैसे साइकिलें शहर की सड़कों पर अपनी जगह बना रहीं, इसी बीच मोटरसाइकिलें भी चुप-चाप शहर की गलियों में प्रवेश करने लगीं। रॉयल एनफील्ड जैसी प्रसिद्ध ब्रांडों ने इस क्षेत्र में अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए। इससे मोटरसाइकिलों की उपलब्धता में तेजी से वृद्धि हुई।
वर्तमान समय में दोपहिया वाहन चेन्नई में शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। साइकिलें हों या मोटरसाइकिलें, दोनों ही शहरवासियों के लिए आवाजाही का सबसे सुविधाजनक और किफायती माध्यम साबित हुई हैं। राजमार्गों से लेकर संकरी गलियों तक, ये वाहन चेन्नई के यातायात प्रणाली की रीढ़ बन गए हैं।