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टायर निर्माता BS-VII मानदंडों के लिए तैयार, परीक्षण नियमों पर चाहते हैं स्पष्टता
अप्रैल 2031 से लागू होने वाले टायर घिसाव मानदंड निर्माताओं को अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। वहीं, कंपनियां परीक्षण प्रोटोकॉल पर स्पष्टता चाहती हैं और कच्चे माल की बढ़ती लागत से जूझ रही हैं।
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भारत के टायर निर्माता अगले दशक में लागू होने वाले नए पर्यावरणीय मानदंडों को अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। अप्रैल 2031 से प्रभावी होने वाले BS-VII घिसाव मानदंड उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएंगे और शोध एवं विकास गतिविधियों में उल्लेखनीय निवेश की आवश्यकता होगी।
इस संदर्भ में, निर्माताओं ने सरकारी नियामकों से परीक्षण प्रोटोकॉल और अनुपालन मानकों की विस्तृत जानकारी देने का अनुरोध किया है। स्पष्ट दिशानिर्देश से उद्योग को नई तकनीकों को विकसित करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को संशोधित करने में आसानी होगी।
वहीं, कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि टायर निर्माताओं के लिए एक अतिरिक्त चुनौती बन गई है। बढ़ती लागत के बीच नए मानदंडों को पूरा करने के लिए तकनीकी सुधार करना उद्योग के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में टायर निर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। नए मानदंडों के अनुरूप आने के लिए कंपनियों को अपनी विनिर्माण प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना होगा और पर्यावरण-अनुकूल समाधानों में निवेश करना होगा।